बुधवार 2 सितंबर 2026 - 17:41
सीरीक में शादी समारोह पर अमेरिका का हमला युद्ध अपराध का स्पष्ट उदाहरण है

आयतुल्लाह अलीरज़ा आराफी ने हुर्मुज़गान प्रांत के सीरीक इलाके में आवासीय क्षेत्रों और शादी समारोह पर अमेरिका के हवाई हमले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इस हमले को राज्य प्रायोजित आतंकवाद और युद्ध अपराध का स्पष्ट उदाहरण बताते हुए दुश्मन की पूरी तरह से निरोधक स्थिति हासिल होने तक उसके खिलाफ प्रतिरोध और जवाबी कार्रवाई जारी रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, हौज़ा हाए इल्मिया ईरान के प्रमुख आयतुल्लाह आयतुल्लाह अलीरज़ा आराफी ने आज तड़के अमेरिकी हमलावरों द्वारा हुर्मुज़गान प्रांत के सीरीक इलाके में आवासीय क्षेत्रों और एक शादी समारोह पर किए गए हवाई हमले की कड़ी निंदा करते हुए एक बयान जारी किया। बयान का पूरा पाठ इस प्रकार है:

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम

“وَ مَن قُتِلَ مَظْلُومًا فَقَدْ جَعَلْنَا لِوَلِیِّهِ سُلْطَانًا فَلَا یُسْرِف فِّی الْقَتْلِ إِنَّهُ کَانَ مَنصُورًا और जो व्यक्ति अत्याचारपूर्वक मारा जाए, हमने उसके उत्तराधिकारी को अधिकार दिया है, लेकिन वह हत्या में सीमा से आगे न बढ़े। निश्चय ही उसकी सहायता की गई है।” (सूर ए इसरा, आयत 33)

एक बार फिर वर्चस्ववादी और साम्राज्यवादी व्यवस्था, विशेष रूप से आक्रामक अमेरिकी शासन का घृणित चेहरा और अमानवीय प्रकृति एक क्रूर अपराध के रूप में सामने आई है। आज तड़के हुर्मुज़गान प्रांत के सीरीक इलाके में आवासीय क्षेत्रों और एक शादी समारोह पर किए गए हवाई हमले में निर्दोष नागरिकों, जिनमें महिलाएं और मासूम बच्चे भी शामिल हैं, के मारे जाने और घायल होने से इस कायरतापूर्ण हमले की भयावहता और अधिक स्पष्ट हो गई है।

यह अपराध इस्लामाबाद समझौते के उल्लंघन और ईरान की मज़लूम जनता के खिलाफ अमेरिकी सैनिकों के लगातार क्रूर हमलों की कड़ी का हिस्सा है। इनमें मीनाब के शजरे तैय्यबा स्कूल पर बमबारी कर दर्जनों छात्रों को शहीद करना, लामर्द व्यायमगृह, अस्पतालों और अन्य गैर-सैन्य ठिकानों पर हमले शामिल हैं। इन घटनाओं ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अमेरिका का राज्य आतंकवाद किसी सीमा को नहीं मानता और निर्दोष लोगों की सुरक्षा तथा उनके जीवन का उसके लिए कोई मूल्य नहीं है। इन त्रासदियों पर मानवाधिकारों के झूठे दावेदारों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की शर्मनाक चुप्पी गंभीर चिंतन और सवाल का विषय है।

दुश्मन यह जान लें कि गौरवशाली ईरान, प्रतिरोध की धुरी तथा देश के सभी सैन्य और नागरिक संस्थान, अल्लाह की कृपा से इस्लाम, ईरान और उम्मत-ए-इस्लाम पर होने वाले हमलों के सामने डटे रहेंगे। अल्लाह की मदद और हज़रत वली-ए-अस्र (अ) की कृपा से वे वैश्विक और शैतानी वर्चस्व के खिलाफ प्रतिरोध का एक नया अध्याय और नया आदर्श प्रस्तुत करेंगे तथा क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय समीकरणों में एक महत्वपूर्ण और सभ्यतागत चरण की रूपरेखा तैयार करेंगे।

मरकज़ ए मुदीरियत हौज़ा ए इल्मिया और उच्च धार्मिक संस्थान, तमाम सम्मानित धर्मगुरुओं के साथ, अपने देशवासियों की सामूहिक शहादत पर संवेदना व्यक्त करते हैं और घायलों तथा दिव्यांग हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं। वे इस बर्बर कार्रवाई की, जो सभी अंतरराष्ट्रीय नियमों और मानवीय सिद्धांतों के विरुद्ध है, कड़ी निंदा करते हैं और इसे राज्य आतंकवाद तथा युद्ध अपराध का स्पष्ट उदाहरण मानते हैं। साथ ही, इस्लामी गणराज्य ईरान की शक्तिशाली सशस्त्र सेनाओं का समर्थन करते हुए उनसे आग्रह करते हैं कि वे सर्वोच्च कमांडर के आदेश का पालन करते हुए दुश्मन को ऐसा पछताने वाला जवाब देते रहें, जब तक पूरी तरह से निरोधक स्थिति हासिल न हो जाए। साथ ही, इस्लामी प्रतिरोध की धुरी और उम्मत-ए-इस्लाम की शक्ति और प्रभाव को और मजबूत करें।

“و ما النصر إلاّ من عند الله العزیز الحکیم और विजय केवल अल्लाह, जो अत्यंत शक्तिशाली और हिकमत वाला है, की ओर से है।”

अलीरज़ा आराफ़ी

हौज़ा हाए इल्मिया के प्रमुख

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